आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ९१

वैशम्पाय़न उवाच

ततोऽव्रवीद्वासुदेवो धर्मराजं युधिष्ठिरम् |  १८   क
यथाह भगवान्व्यासस्तथा तत्कर्तुमर्हसि ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति