शान्ति पर्व  अध्याय ३३०

श्रीभगवानु उवाच

शव्द एकमतैरेष व्याहृतः परमर्षिभिः |  १९   क
नान्यो ह्यधोक्षजो लोके ऋते नाराय़णं प्रभुम् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति