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शान्ति पर्व
अध्याय २७८
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भीष्म उवाच
स तेनाढ्यो महाय़ोगी तपसा च धनेन च |  २६   क
व्यराजत महाराज त्रिषु लोकेषु वीर्यवान् ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति