शान्ति पर्व  अध्याय २००

भीष्म उवाच

आश्रय़ं सर्वभूतानां मनसेति विशुश्रुम |  ११   क
स धारय़ति भूतात्मा उभे भूतभविष्यती ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति