शान्ति पर्व  अध्याय २००

भीष्म उवाच

स तत्र भगवान्देवः पुष्करे भासय़न्दिशः |  १३   क
व्रह्मा समभवत्तात सर्वभूतपितामहः ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति