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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९४
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वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मो महांस्त्यागो दानं भूतदय़ा तथा |  ३१   क
व्रह्मचर्यं तथा सत्यमनुक्रोशो धृतिः क्षमा |  ३१   ख
सनातनस्य धर्मस्य मूलमेतत्सनातनम् ||  ३१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति