उद्योग पर्व  अध्याय ५७

वैशम्पाय़न उवाच

एतावदुक्त्वा राजा तु स सर्वान्पृथिवीपतीन् |  २९   क
अनुभाष्य महाराज पुनः पप्रच्छ सञ्जय़म् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति