वन पर्व  अध्याय १२

विदुर उवाच

स नष्टमाय़ोऽतिवलः क्रोधविस्फारितेक्षणः |  २०   क
काममूर्तिधरः क्षुद्रः कालकल्पो व्यदृश्यत ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति