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वन पर्व
अध्याय २०१
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व्याध उवाच
तेषामपि गुणाः सर्वे गुणवृत्तिः परस्परम् |  १७   क
पूर्वपूर्वगुणाः सर्वे क्रमशो गुणिषु त्रिषु ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति