वन पर्व  अध्याय २०१

व्याध उवाच

सर्वैरिहेन्द्रिय़ार्थैस्तु व्यक्ताव्यक्तैः सुसंवृतः |  २०   क
चतुर्विंशक इत्येष व्यक्ताव्यक्तमय़ो गुणः |  २०   ख
एतत्ते सर्वमाख्यातं किं भूय़ो श्रोतुमिच्छसि ||  २०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति