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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
अथ रुद्र उपाधावत्तावृषी तपसान्वितौ |  ४७   क
तत एनं समुद्धूतं कण्ठे जग्राह पाणिना |  ४७   ख
नाराय़णः स विश्वात्मा तेनास्य शितिकण्ठता ||  ४७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति