अनुशासन पर्व  अध्याय १२७

भीष्म उवाच

दिव्यपुष्पसमाकीर्णं दिव्यमालाविभूषितम् |  ७   क
दिव्यचन्दनसंय़ुक्तं दिव्यधूपेन धूपितम् |  ७   ख
तत्सदो वृषभाङ्कस्य दिव्यवादित्रनादितम् ||  ७   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति