शान्ति पर्व  अध्याय २०२

पितामह उवाच

निहत्य दानवपतीन्महावर्ष्मा महावलः |  २९   क
एष देवो महाय़ोगी भूतात्मा भूतभावनः ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति