शान्ति पर्व  अध्याय २०२

पितामह उवाच

सर्वभूतेश्वरो योगी योनिरात्मा तथात्मनः |  ३०   क
स्थिरीभवत कृष्णोऽय़ं सर्वपापप्रणाशनः ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति