आदि पर्व  अध्याय २०३

नारद उवाच

सा विग्रहवतीव श्रीः कान्तरूपा वपुष्मती |  १६   क
जहार सर्वभूतानां चक्षूंषि च मनांसि च ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति