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शान्ति पर्व
अध्याय २०३
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गुरुरु उवाच
नवद्वारं पुरं पुण्यमेतैर्भावैः समन्वितम् |  ३५   क
व्याप्य शेते महानात्मा तस्मात्पुरुष उच्यते ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति