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वन पर्व
अध्याय २०३
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व्राह्मण उवाच
पार्थिवं धातुमासाद्य शारीरोऽग्निः कथं भवेत् |  १३   क
अवकाशविशेषेण कथं वर्तय़तेऽनिलः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति