शान्ति पर्व  अध्याय २०२

भीष्म उवाच

ततो देवादिदेवः स योगात्मा योगसारथिः |  २०   क
योगमास्थाय़ भगवांस्तदा भरतसत्तम ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति