वन पर्व  अध्याय २०५

व्याध उवाच

श्रद्दधस्व मम व्रह्मन्नान्यथा कर्तुमर्हसि |  १०   क
गम्यतामद्य विप्रर्षे श्रेय़स्ते कथय़ाम्यहम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति