वन पर्व  अध्याय २०३

व्याध उवाच

प्रकाशवहुलो धीरो निर्विवित्सोऽनसूय़कः |  ७   क
अक्रोधनो नरो धीमान्दान्तश्चैव स सात्त्विकः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति