आदि पर्व  अध्याय २०४

नारद उवाच

दक्षिणे तां करे सुभ्रूं सुन्दो जग्राह पाणिना |  १३   क
उपसुन्दोऽपि जग्राह वामे पाणौ तिलोत्तमाम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति