आदि पर्व  अध्याय २०४

नारद उवाच

देवगन्धर्वय़क्षाणां नागपार्थिवरक्षसाम् |  २   क
आदाय़ सर्वरत्नानि परां तुष्टिमुपागतौ ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति