आदि पर्व  अध्याय २०४

वैशम्पाय़न उवाच

द्रौपद्या नः सहासीनमन्योऽन्यं योऽभिदर्शय़ेत् |  २८   क
स नो द्वादश वर्षाणि व्रह्मचारी वने वसेत् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति