वन पर्व  अध्याय २०४

वृद्धावू ऊचतुः

मनसा कर्मणा वाचा शुश्रूषा नैव हीय़ते |  ११   क
न चान्या वितथा वुद्धिर्दृश्यते साम्प्रतं तव ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति