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आदि पर्व
अध्याय २०५
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वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणस्य उपाहृत्य यशः पीत्वा च पाण्डवः |  २२   क
आजगाम पुरं वीरः सव्यसाची परन्तपः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति