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शान्ति पर्व
अध्याय २०५
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गुरुरु उवाच
महाभूतानीन्द्रिय़ाणि गुणाः सत्त्वं रजस्तमः |  १९   क
त्रैलोक्यं सेश्वरं सर्वमहङ्कारे प्रतिष्ठितम् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति