शान्ति पर्व  अध्याय २०५

शिष्य उवाच

के दोषा मनसा त्यक्ताः के वुद्ध्या शिथिलीकृताः |  २५   क
के पुनः पुनराय़ान्ति के मोहादफला इव ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति