menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २०५
chevron_left
chevron_right
व्राह्मण उवाच
दुर्ज्ञेय़ः शाश्वतो धर्मः शूद्रय़ोनौ हि वर्तता |  १९   क
न त्वां शूद्रमहं मन्ये भवितव्यं हि कारणम् |  १९   ख
येन कर्मविपाकेन प्राप्तेय़ं शूद्रता त्वय़ा ||  १९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति