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अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
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वासुदेव उवाच
यावदेतत्प्रलिप्तं ते गात्रेषु मधुसूदन |  ३८   क
अतो मृत्युभय़ं नास्ति यावदिच्छा तवाच्युत ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति