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आदि पर्व
अध्याय २०६
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अर्जुन उवाच
तव चापि प्रिय़ं कर्तुमिच्छामि जलचारिणि |  २२   क
अनृतं नोक्तपूर्वं च मय़ा किञ्चन कर्हिचित् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति