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आदि पर्व
अध्याय २०६
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अर्जुन उवाच
कथं च नानृतं तत्स्यात्तव चापि प्रिय़ं भवेत् |  २३   क
न च पीड्येत मे धर्मस्तथा कुर्यां भुजङ्गमे ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति