आदि पर्व  अध्याय २०६

उलूप्यु उवाच

दीनाननाथान्कौन्तेय़ परिरक्षसि नित्यशः |  ३१   क
साहं शरणमभ्येमि रोरवीमि च दुःखिता ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति