शान्ति पर्व  अध्याय २०६

गुरुरु उवाच

तद्वीजं देहिनामाहुस्तद्वीजं जीवसञ्ज्ञितम् |  १३   क
कर्मणा कालय़ुक्तेन संसारपरिवर्तकम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति