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वन पर्व
अध्याय २०६
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व्राह्मण उवाच
व्राह्मणः पतनीय़ेषु वर्तमानो विकर्मसु |  ११   क
दाम्भिको दुष्कृतप्राय़ः शूद्रेण सदृशो भवेत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति