वन पर्व  अध्याय २०६

ऋषिरु उवाच

नान्यथा भविता शाप एवमेतदसंशय़म् |  ३   क
आनृशंस्यादहं किञ्चित्कर्तानुग्रहमद्य ते ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति