वन पर्व  अध्याय २०६

युधिष्ठिर उवाच

अत्यद्भुतमिदं व्रह्मन्धर्माख्यानमनुत्तमम् |  ३३   क
सर्वधर्मभृतां श्रेष्ठ कथितं द्विजसत्तम ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति