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विराट पर्व
अध्याय २७
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्र नाहं तथा मन्ये यथाय़मितरो जनः |  १२   क
पुरे जनपदे वापि यत्र राजा युधिष्ठिरः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति