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शान्ति पर्व
अध्याय २०७
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गुरुरु उवाच
दश विद्याद्धमन्योऽत्र पञ्चेन्द्रिय़गुणावहाः |  १७   क
याभिः सूक्ष्माः प्रताय़न्ते धमन्योऽन्याः सहस्रशः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति