menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २०७
chevron_left
chevron_right
गुरुरु उवाच
नेत्रहीनो यथा ह्येकः कृच्छ्राणि लभतेऽध्वनि |  ४   क
ज्ञानहीनस्तथा लोके तस्माज्ज्ञानविदोऽधिकाः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति