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विराट पर्व
अध्याय ६३
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः स राजा मत्स्यानां विराटो वाहिनीपतिः |  ५   क
उत्तरं परिपप्रच्छ क्व यात इति चाव्रवीत् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति