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कर्ण पर्व
अध्याय ६२
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सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी परवीरघाती; हताश्वमालोक्य नरप्रवीरम् |  ५५   क
तमभ्यधावद्वृषसेनमाहवे; स सूतजस्य प्रमुखे स्थितं तदा ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति