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शान्ति पर्व
अध्याय १३५
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भीष्म उवाच
ग्रस्तमेव तदुद्दानं गृहीत्वास्त तथैव सः |  १४   क
सर्वानेव तु तांस्तत्र ते विदुर्ग्रथिता इति ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति