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आदि पर्व
अध्याय २०९
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व्राह्मण उवाच
तदा यूय़ं पुनः सर्वाः स्वरूपं प्रतिपत्स्यथ |  १०   क
अनृतं नोक्तपूर्वं मे हसतापि कदाचन ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति