आदि पर्व  अध्याय २०९

वर्गो उवाच

तत्राशु पुरुषव्याघ्रः पाण्डवो वो धनञ्जय़ः |  १८   क
मोक्षय़िष्यति शुद्धात्मा दुःखादस्मान्न संशय़ः ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति