आदि पर्व  अध्याय २०९

वैशम्पाय़न उवाच

ततस्ताः पाण्डवश्रेष्ठः सर्वा एव विशां पते |  २१   क
तस्माच्छापाददीनात्मा मोक्षय़ामास वीर्यवान् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति