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वन पर्व
अध्याय २०९
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मार्कण्डेय़ उवाच
अनुकूजन्ति येनेह वेदनार्ताः स्वय़ं जनाः |  १५   क
तस्य पुत्रः स्वनो नाम पावकः स रुजस्करः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति