शान्ति पर्व  अध्याय १५१

भीष्म उवाच

स परित्यज्य शाखाश्च पत्राणि कुसुमानि च |  २०   क
प्रभाते वाय़ुमाय़ान्तं प्रत्यैक्षत वनस्पतिः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति