आदि पर्व  अध्याय २१

सूत उवाच

शुक्लस्त्वं वहुलश्चैव कला काष्ठा त्रुटिस्तथा |  १४   क
संवत्सरर्तवो मासा रजन्यश्च दिनानि च ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति