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शान्ति पर्व
अध्याय १२०
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भीष्म उवाच
अग्निस्तोको वर्धते ह्याज्यसिक्तो; वीजं चैकं वहुसाहस्रमेति |  ३६   क
क्षय़ोदय़ौ विपुलौ संनिशाम्य; तस्मादल्पं नावमन्येत विद्वान् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति