menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २१
chevron_left
chevron_right
व्राह्मण उवाच
ततो वाचस्पतिर्जज्ञे समानः पर्यवेक्षते |  ४   क
रूपं भवति वै व्यक्तं तदनुद्रवते मनः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति